Dilse पढ़िए, मेरे साथ कुछ मोटिवेशनल शायरियां ! जो आपके अन्दर आग लगा देगी !
कामयाब होने की चाहत तो सब में होती है,परंतु सिर्फ चाहने से कुछ नहीं होता। उस चाहत को पाने के लिए,उस चाहत के अनुसार मेहनत भी करना पड़ता है! तभी कामयाबी हासिल होती हैं इसलिए मेरा कहना है कि:-
जिसने अपने जीवन में कोई लक्ष्य बनाया नहीं,
अपने आप-को उस लक्ष्य के अनुरूप भगाया नहीं,
जनाब़ ! कामयाबी उन्हें नसीब नहीं होती - 2
तो कहते हैं कि हमने जीवन में कुछ पाया नहीं।
Image:- download 👇
Love shayari
Jisne apne jiwan me koi lakshya banaya nahi,
Apne aap ko us laksh ke anurup bhagaya nahi,
Janaab ! kamyabi use naseeb nahi hoti -2
To kahta hai ki hamne jiwan me kuchh paya nahi.
एक बात तो सभी जानते हैं कि जीवन में खुश रहना बहुत जरूरी है,और सभी खुश रहते भी हैं!परंतु फर्क बस इतना होता है कि कोई खुद की कामयाबी पर खुश रहता है,तो कोई दूसरों की नाकामी पर ! एक बार एक लड़का अपने कुछ मजबूरी के कारण जब असफल हो जाता है तो कुछ लोग बहुत खुश होते हैं और उसका मजाक उड़ाने लगते हैं तब वह दुखी होता है और उनसे कहता है:-
हंसकर मेरी नाकामी पर,तूने मेरे जज्बात से खेला है,
देख मेरी गरीबी को,आज मेरे हालात से खेला है
चलकर गिरना,गिरकर उठना तो मेरी फितरत है-2
गिरने पर फेंक कीचड़ मेरे, प्राणाघात से खेला है।
Image:- download
Hanskar meri nakami par tune meri jajbat se khela hai,
dekh meri garibi ko aaj meri halat se khela hai
chalkar girna girkar uthna to meri fitrar hai
girne par phek kichar mere pranaghaat se khela hai.
धरती पर मनुष्य जन्म लेने के बाद यहां की संसारिक दुनिया में खो जाता है और बढ़ती उम्र के साथ खुद में बहुत सारी इच्छाएं पालने लगता है कि मैं ये करूंगा , वो करूंगा ! मेरे पास ये होगा, वो होगा ! लेकिन दुनियाँ कि सच्चाई तो सिर्फ एक ही सवाल " मैं कौन हूं ? " के उत्तर में छिपा हुआ है ! जिसने भी इस सवाल का उत्तर ढूंढ लिया, उसे किसी और सवालों का उत्तर ढूंढने के जरूरत ही नहीं होती !और जो इसका उत्तर नहीं ढूंढ पाता है उसको समझाने के लिए कहना पड़ता है कि:-
ख़ाक से बने जिस्म पर,क्या ख़ाक इतराते हो,
मिलना है एक दिन ख़ाक में ये खुद को नहीं समझाते हो,
अभी तू है बहुत अनाड़ी तुझमें जरा संताप नहीं-2
तभी तो खुद से देखो, खुदमें हम लगाते हो।
Image:- download
Khak se bane jism par kya khak itrate ho,
Milna hai ek din khak me ye khud ko nahi samjhate ho,
Abhee tu hai bahut anaari tujhme jara santap nahi-2
Tabhee to khud se dekho, khud me ham lagate ho.
0 Comments
आपको ये post पढ़कर कैसा लगा मुझे comment करें !